आयुष्मान कार्ड योजना में बड़े बदलाव ; फ्री इलाज में बडा बदलावं जाणीये सविस्तर जाणकारी.
आयुष्मान भारत योजना को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अब सभी लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड केवल *आधार ई-केवाईसी (e-KYC)* के बाद ही बनाए जाएंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) ने इसके लिए ‘बेनिफिशियरी आइडेंटिफिकेशन सिस्टम’ (BIS) लागू किया है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य कार्ड बनाने की प्रक्रिया में होने वाली धोखाधड़ी को रोकना और सही लाभार्थियों तक लाभ पहुँचाना है।
योजना में एक और बड़ा बदलाव यह किया गया है कि अब कार्ड में नए सदस्यों को जोड़ने के विकल्प को सीमित कर दिया गया है। अब केवल SECC 2011 के डेटाबेस के तहत बचे हुए परिवारों में ही इस विकल्प का उपयोग करके परिवार के नए सदस्य जोड़े जा सकेंगे। इसके अलावा, संदिग्ध और फर्जी कार्डों की पहचान करने के लिए सरकार अब *आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)* और ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रही है। यदि कोई कार्ड संदिग्ध पाया जाता है, तो उस पर मिलने वाला मुफ्त इलाज तुरंत रोक दिया जाता है और ऑडिटर्स द्वारा उसकी गहन जांच की जाती है।
अस्पतालों के भुगतान (Payments) को लेकर भी सरकार ने बड़ी राहत दी है। आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों के दावों का निपटान अब *30 दिनों के भीतर* करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए जांच करने वाले डॉक्टरों और मेडिकल ऑडिटर्स की संख्या 40 से बढ़ाकर 130 कर दी गई है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल जनवरी में जहाँ 10 लाख दावे लंबित थे, वहीं इस साल यह संख्या घटकर केवल 3 लाख रह गई है।
दिसंबर तक सरकार द्वारा अस्पतालों को लगभग 4000 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इन तकनीकी और प्रशासनिक बदलावों से पात्र लाभार्थियों को बिना किसी बाधा के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी और अस्पतालों को भी उनके दावों का पैसा समय पर मिल सकेगा।